हमारे सीखने का सफ़र

इस्माइल और सद्दाम

मेरा नाम इस्माइल है और मेरा नाम सद्दाम ।

हम आगाज़ के साथ काफ़ी सालों से जुड़े हुए हैं और हम दोनों आगाज़ के Repertory Members भी हैं।

हमने कुछ तीन महीने पहले Learning Sessions लेना शुरू करा है, स्वपनिका, सुब्बू, और संयुक्ता के साथ। Learning Sessions में हमें बच्चों के साथ कैसे काम करना है वो सिखाया जाता है।

हम ये Learning Sessions इसलिए भी ले रहे हैं ताकि हम दोनों अपनेआपको और बेहतर जान सकें। खुद को बेहतर समझने से बच्चों के साथ हम बेहतर तरीके से काम कर पायेंगे। हमारा मानना है कि अगर हम अपनेआप को ही नहीं जानते, और अपने ही skills को नहीं पहचानते, या उनपे काम करना नहीं जानते, तो बच्चों को कैसे समझेंगे?

शुरुआत में हमने अपने “goals” को discuss किया, और समझा। इस discussion से हमने realize किया कि कहीं न कहीं हम इन बच्चों में अपनेआप को देखते हैं। हमारे साथ भी सालों पहले इसी तरह काम करा गया था, इसलिए आज हम इतना सोच समझ पा रहे हैं। हमारी भी बस यही कोशिश है कि हम इस काम को आगे बढ़ा सकें। हमारे काम से अगर थोड़े भी बच्चे खुद को बेहतर समझ पायें, और सही रास्ता चुनने की क्षमता रख पायें — यही हमारा goal है।

हम Learning Session में अलग अलग चीज़ों के बारे में बात करते हैं, सीखते हैं। जैसे की एक चीज़ जिस पर हमने recently काफ़ी सोचा है वो है: शिक्षा। शिक्षा क्या है? हम खुद को शिक्षित कैसे करते हैं? शिक्षा और अनुशासन के बीच का रिश्ता क्या है? इस बातचीत से कुछ नयी चीज़ें निकल कर आईं- ऐसा ज़रूरी नहीं है कि शिक्षा सिर्फ जो हम school या college से लेते हैं बस वही है; शिक्षा हम कहीं भी किसी से भी ले सकते हैं, किसी भी चीज़ से हम कुछ सीख सकते हैं; हम शिक्षा कई अलग अलग तरीकों से लेते हैं — जैसे सुन कर, देख कर, पढ़कर etc. इसी तरह discipline भी सबके लिए अलग अलग होता है। किसी के लिए वक्त पर काम करना Discipline होता है तो किसी के लिए regular time पर खाना खाना discipline होता है।

Starting में तो Learning Sessions में हम बैठ कर बातें करते थे और सोच-विचार करने पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता था जो कि एक amazing तरीका था काम करने का। फिर हमारे साथ physically काम भी शुरू हुआ जो हमारे लिए सोने पर सुहागा हो गया। हमारे साथ mind पर, गहराई से सोच पाने पर तो खूब काम हो रहा था, लेकिन physically activities करने से हमें बच्चों के साथ on ground काम करने के ideas भी मिलने लगे। इन दोनों तरीकों से हमें training मिल रही है।

Learning Session के notes

आगाज़ से 4 repertory members — जैज़मीन, नगमा, नगीना और ज़ैनब already डेढ़ साल से बच्चों के साथ on ground काम कर रहे हैं और अप्रैल 2021 से Learning Sessions भी ले रहे हैं। हमारे उनके साथ combined sessions भी होते हैं और इन sessions में हमें उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है, जैसे कि वो बच्चों के साथ कैसे काम करते हैं, कौन-कौन से challenges face करने होते हैं, उसको सुलझाने के लिए उनके क्या क्या तरीके हैं, etc. इससे हम भी बेहतर prepare होते हैं। और हम कई चीज़ें साथ में disucss कर पाते हैं- जैसे नए नए ideas जो वो बच्चों के साथ काम करते वक्त apply भी करते हैं।

Recently हम दोनो ने नगीना के साथ उनके बच्चों के साथ जाकर सेशन लिए। ये भी एक अलग और नया experience था। बातों में session plan करना, या उस पर reflection सुनना तो आसान है लेकिन जब practically बच्चों के साथ काम करने गए तो हमको एक अलग दुनिया देखने और experience करने को मिली।

जैसे Learning Centre की space को बच्चों के लिए एक जादुई सी दुनिया बनाया हुआ है, और इस imagination को support करने के लिए अलग अलग rituals हैं। बच्चे Learning Centre को एक गुफ़ा मानते हैं, जिसके अंदर घुसके सब एक अलग अलग “character” बन जाते हैं, ऐसे characters जो गुफ़ा में पाये जायें। इस गुफ़ा में enter करने के लिए एक ‘password’ बोलना होता है (“खुलजा सिम सिम”)। हमने भी अपना नया नाम रखा (इस्माइल — Stone, सद्दाम — Spider)। बच्चों के साथ engage करना थोड़ा मुश्किल होता है; हमें ध्यान रखना होता है उन्हे कोई बात या चीज़ बुरी ना लग जाये वरना उनसे दोस्ती कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है, ताकि वो उस space में comfortable और safe महसूस करें। हमें समझ आया कि बच्चों को engage करने के लिए उन्हे मज़े करना ज़रूरी है, पर कभी कभी seriously भी बात करनी पड़ती है ताकि वो और ध्यान से session attend करें। ऐसी चीज़ों को practically कैसे apply करना है, session में behave कैसे करना है, ये सब हमने नगीना के साथ session में थोड़ा थोड़ा experience किया और देखा।

और भी rituals हैं जो बच्चों के साथ बनायी हुई इस जादुई दुनिया को “असली” बनाते हैं। जैसे कि Learning Centre / गुफ़ा से निकलते वक़्त भी एक password बोलना; गुफ़ा की दिवार में काई होती है तो Centre की दीवार से लगके ना खड़े होना या बैठना। इन सब rules / rituals की ज़रूरत हमें session लेने पर ज़्यादा अच्छे से समझ आयी। ये सिर्फ उस space को तब्दील करने के लिये नहीं, पर activities को अच्छे से conduct करने में, और sessions को एक structure देने का काम भी करते है। सारे rituals को सबने मिलकर बनाया है और उनको हर बार follow करना, उनकी respect करना भी session का हिस्सा है। इससे बच्चे भी उस space को अपना मानकर उसकी ownership ले पाते हैं । ये भी एक तरीका है ‘anushasan’ बनाने का।

निज़ामुद्दीन Learning Centre में बच्चों के साथ काम

अब हमारी भी पूरी पूरी उम्मीद है कि हम बहुत जल्द बच्चों के साथ काम करना शुरू करेंगे और बहुत कुछ नया सीखेंगे।

Ismail Sheikh is a founding member at Aagaaz Theatre Trust. He has performing professionally in plays from the organization’s repertoire since 2015. Along with his college studies, he is learning to be a theatre maker and facilitator.

Saddam has been with Aagaaz since 2009, and is now practicing theatre and exploring work opportunities. He has finished his schooling and is mostly found listening to music, drawing or playing cricket. Theatre facilitation with young children is one of Saddam’s roles in the organisation.

An arts based organisation dedicated to creating inclusive learning spaces that nurture curiosity and critical thought while creating safe spaces for dialogue.

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
Aagaaz Theatre Trust

Aagaaz Theatre Trust

An arts based organisation dedicated to creating inclusive learning spaces that nurture curiosity and critical thought while creating safe spaces for dialogue.

More from Medium

YSL Beauty NU Campaign Features

Inside FBC: Meet NumberNomads!

KWoC Project Report

Differences between static and dynamic libraries